Bharat tiwari koun tha ? Police ne kyu mara Bharat tiwari ko ?

Bharat tiwari encounter

बिहार के भोजपुर जिले के बिलाउती गांव के रहने वाले भरत भूषण तिवारी (उम्र लगभग 26-28 वर्ष) की जून 2026 में हुई पुलिस एनकाउंटर में मौत ने पूरे राज्य में एक बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। सोशल मीडिया पर खुद को 'क्रांतिकारी' कहने वाले भरत तिवारी के इस मामले को लेकर पुलिस के दावे और परिवार/स्थानीय लोगों के आरोपों में भारी अंतर है।

घटनाक्रम और एनकाउंटर की वजहों को नीचे चरणबद्ध (step-wise) तरीके से समझा जा सकता है:

1. पृष्ठभूमि और विवाद की शुरुआत

स्थानीय मुद्दों को उठाना:

 भरत तिवारी सोशल मीडिया (फेसबुक) पर काफी सक्रिय थे और उनके करीब 1.6 लाख फॉलोअर्स थे। वह बाढ़ पीड़ितों के पुनर्वास और प्रशासनिक कमियों जैसे स्थानीय मुद्दों को लेकर मुखर थे। परिवार का आरोप है कि प्रशासन और स्थानीय अधिकारियों की आलोचना करने के कारण वे निशाने पर आ गए थे।

हथियार रखना और तनाव: 

भरत ने सुरक्षा का हवाला देकर एक पिस्तौल ले रखी थी। 16 जून 2026 को जब सुबह पुलिस उनके घर पहुंची, तो तनाव बढ़ गया। भरत ने उत्तेजित होकर पुलिस पर पिस्तौल तान दी और उन्हें जाने को कहा।

2. दो दिनों का गतिरोध और फेसबुक लाइव (16-17 जून)

पुलिस का दावा: 

भोजपुर पुलिस के अनुसार, उन्हें सूचना मिली थी कि एक युवक शाहपुर थाना क्षेत्र में पिस्तौल लहराते हुए हवा में फायरिंग कर रहा है। पुलिस ने शुरुआती बयानों में भरत को 'मानसिक रूप से अस्वस्थ' (mentally unsound) बताया और कहा कि वे उसे सुरक्षित हिरासत में लेकर इलाज के लिए भेजना चाहते थे।

लगातार लाइव स्ट्रीमिंग: 

इस पूरे गतिरोध के दौरान भरत तिवारी लगातार फेसबुक पर लाइव वीडियो बना रहे थे। उन्होंने एक वीडियो में कहा कि प्रशासन उन्हें 'पागल' साबित करना चाहता है, ठीक वैसे ही जैसे समाज के लिए लड़ने वाले भगत सिंह को भी कहा गया था।

3. एनकाउंटर का दिन (17 जून 2026)

17 जून की सुबह पुलिस और बिहार एसटीएफ (STF) के जवान बुलेटप्रूफ जैकेट पहनकर बिलाउती गांव पहुंचे और पूरे इलाके की घेराबंदी कर दी। इसके बाद की घटना को लेकर दो अलग-अलग पक्ष हैं:

पुलिस की थ्योरी (आत्मरक्षा का दावा): 

पुलिस के अनुसार, घेराबंदी के दौरान भरत तिवारी ने पुलिस पर फायरिंग शुरू कर दी। अधिकारियों और स्थानीय नागरिकों की सुरक्षा को खतरा देखते हुए पुलिस ने जवाबी कार्रवाई (retaliation) की, जिसमें भरत के पैरों में गोलियां लगीं। इलाज के दौरान पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल (PMCH) में उनकी मौत हो गई।

परिवार और चश्मदीदों के आरोप (फर्जी एनकाउंटर का दावा):

 परिवार और सोशल मीडिया पर मौजूद आखिरी लाइव वीडियो के अनुसार, भरत तिवारी ने प्रशासन के सामने आत्मसमर्पण (Surrender) करने की इच्छा जताई थी। वीडियो में वे यह कहते सुने गए कि अगर उनकी मांगें मान ली जाती हैं, तो वे हथियार डालने को तैयार हैं, जिसके बाद उन्होंने हवा में एक फायर किया और पिस्तौल पुलिस की तरफ फेंक दी। परिवार का आरोप है कि निहत्थे होने के बाद पुलिस उन्हें खेत में ले गई और उन पर ताबड़तोड़ गोलियां चला दीं।

4. घटना के बाद की कार्रवाई और वर्तमान स्थिति

भारी आक्रोश और प्रदर्शन: 

एनकाउंटर की खबर फैलते ही भोजपुर और बिहार के अन्य हिस्सों में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए। स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने इसे 'फर्जी एनकाउंटर' (Staged Encounter) करार दिया।

पुलिसकर्मियों पर गाज: 

बढ़ते राजनीतिक और जनता के दबाव के बीच बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इस मामले में न्यायिक जांच (Judicial Inquiry) के आदेश दिए।

FIR और निलंबन: 

शाहपुर के थाना प्रभारी (SHO), जगदीशपुर के SDPO और एनकाउंटर में शामिल अन्य पुलिसकर्मियों सहित 6 कर्मियों को निलंबित कर दिया गया और उनके खिलाफ शाहपुर थाने में FIR भी दर्ज की गई है।

मामला सुप्रीम कोर्ट में: 

यह मामला अब देश की सर्वोच्च अदालत (Supreme Court) तक पहुंच गया है, जहां एक याचिका दायर कर पुलिस अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और निष्पक्ष CBI जांच की मांग की गई है।

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